भजन शबद गुरुबानी
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देखी बहुत निराली महिमा सत्संग की
अब सोप दिया इस जीवन
सागर से भी गहरा बन्दे गुरुदेव का प्यार है
32 - क्या पूछते हो क्या तुम से
सजधज के जिस दिन मोत
051 - दोनो जाहान के मालिक
044 - जब तेरी डॉली निकाली जायागी
भवसागर तरने का सिमरन
दोनो जाहान के मालिक
दया करो भगवन
भला किसी कर न सको तो
सोचो जरा करो मन में विचार
सतगुरु नाम के हीरे मोती
गुरु नाम से तरना हैं
बीते जीवन सारा
मिलता हैं सॅचा सुख
सतगुरु में तेरी पतंग
बंदे सतगुरु सतगुरु बोल
क्यों सो रहा मुसाफिर
इंसान जान कर भी
007 - इस जगत सरय में
हर गड़ी हर पल सिमरन तेरा
तेरा करता रहूं गुणगान
001 - अन्दर बढ़के पौड चढ़के